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bhagavat 9.24.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा कि अपने पिता द्वारा लाई गई उस लड़की के गर्भ से विदर्भ को कुश, क्रथ और रोमपाद नामक तीन पुत्र हुए थे। रोमपाद विदर्भ कुल का सबसे प्रिय था।   |   bhagavat अध्याय 9.24: भगवान् श्रीकृष्ण   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 24: भगवान् श्रीकृष्ण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.24.1 
श्रीशुक उवाच
तस्यां विदर्भोऽजनयत् पुत्रौ नाम्ना कुशक्रथौ ।
तृतीयं रोमपादं च विदर्भकुलनन्दनम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा कि अपने पिता द्वारा लाई गई उस लड़की के गर्भ से विदर्भ को कुश, क्रथ और रोमपाद नामक तीन पुत्र हुए थे। रोमपाद विदर्भ कुल का सबसे प्रिय था।
 
Sukadeva Goswami said: From the womb of that girl brought by her father, Vidarbha received three sons-Kusa, Kratha and Romapada. Romapada was very dear to the Vidarbha clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)