Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.23.38: बहुत-बहुत पहले, ज्यमघ ने देवी-देवताओं और पितरों की पूजा कर उन्हें खुश कर दिया था। अब उनकी इच्छा से ज्यमघ के वचन सच हो गए। यद्यपि शैब्या निस्संतान थी, लेकिन देवी-देवताओं की कृपा से वह गर्भवती हुई और समय आने पर उसने विदर्भ नाम के बच्चे को जन्म दिया। क्योंकि बच्चे के जन्म से पहले ही उस लड़की को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया गया था, इसलिए जब विदर्भ बड़ा हुआ तो उसने उससे विवाह कर लिया। | bhagavat अध्याय 9.23: ययाति के पुत्रों की वंशावली । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बहुत-बहुत पहले, ज्यमघ ने देवी-देवताओं और पितरों की पूजा कर उन्हें खुश कर दिया था। अब उनकी इच्छा से ज्यमघ के वचन सच हो गए। यद्यपि शैब्या निस्संतान थी, लेकिन देवी-देवताओं की कृपा से वह गर्भवती हुई और समय आने पर उसने विदर्भ नाम के बच्चे को जन्म दिया। क्योंकि बच्चे के जन्म से पहले ही उस लड़की को बहू के रूप में स्वीकार कर लिया गया था, इसलिए जब विदर्भ बड़ा हुआ तो उसने उससे विवाह कर लिया।
Long ago, Jyaamgh had pleased the gods and ancestors by worshipping them. Now, due to their mercy, Jyaamgh's words came true. Although Shaibya was barren, she became pregnant by the grace of the gods and when the time came, she gave birth to a child named Vidarbha. Since the girl had been accepted as a daughter-in-law even before the birth of the child, when Vidarbha grew up, he married her.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध नौ के अंतर्गत तेईसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥