श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  9.23.30-31 
माधवा वृष्णयो राजन् यादवाश्चेति संज्ञिता: ।
यदुपुत्रस्य च क्रोष्टो: पुत्रो वृजिनवांस्तत: ।
स्वाहितोऽतो विषद्गुर्वै तस्य चित्ररथस्तत: ॥ ३० ॥
शशबिन्दुर्महायोगी महाभागो महानभूत् ।
चतुर्दशमहारत्नश्चक्रवर्त्यपराजित: ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज परीक्षित, यदु, मधु और वृष्णि ने अलग-अलग राजवंशों की स्थापना की थी, इसलिए उनके राजवंश यादव, माधव और वृष्णि के नाम से जाने जाते हैं। यदु के पुत्र क्रोष्टा के पुत्र वृजिनवान थे। वृजिनवान के पुत्र स्वाहित थे, स्वाहित के पुत्र विषद्गु थे, विषद्गु के पुत्र चित्ररथ थे और चित्ररथ के पुत्र शशबिन्दु थे। महान योगी शशबिन्दु चौदहों ऐश्वर्यों से सम्पन्न थे और उनके पास चौदह महान रत्न थे। इस प्रकार वह संसार के सम्राट बने।
 
O King Parikshit, since each of Yadu, Madhu and Vrishni carried on their lineage, their lineages are known as Yadava, Madhava and Vrishni. Yadu's son Kroshta had a son named Vrijinavan. Vrijinavan's son was Swahit, Swahit had Vishadgu, Vishadgu had Chitrarath and Chitrarath had a son named Shashabindu who was a great Yogi and was endowed with fourteen opulences and was the possessor of fourteen great jewels. Thus he became the emperor of the world.
तात्पर्य
मार्कण्डेय पुराण में चौदह प्रकार के महा रत्नों का वर्णन निम्नलिखित रूप में किया गया है: (1) हाथी, (2) घोड़ा, (3) रथ, (4) पत्नी, (5) बाण, (6) धन का भंडार, (7) हार, (8) मूल्यवान वस्त्र, (9) वृक्ष, (10) भाला, (11) फन्दा, (12) जवाहरात, (13) छत्र, और (14) नियामक सिद्धांत। राजा होना है, तो इन चौदह वैभवों का स्वामी होना चाहिए। शशबिंदु इन सभी का स्वामी था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)