Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.23.16: प्रचेता वंश ने भारत के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया, जो वैदिक सभ्यता से रहित था और वहाँ के राजा बन गए। ययाति के दूसरे पुत्र का नाम तुर्वसु था। तुर्वसु का पुत्र वह्नि था, वह्नि का पुत्र भर्ग था और भर्ग का पुत्र भानुमान था। | bhagavat अध्याय 9.23: ययाति के पुत्रों की वंशावली । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
म्लेच्छाधिपतयोऽभूवन्नुदीचीं दिशमाश्रिता: ।
तुर्वसोश्च सुतो वह्निर्वह्नेर्भर्गोऽथ भानुमान् ॥ १६ ॥
अनुवाद
प्रचेता वंश ने भारत के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया, जो वैदिक सभ्यता से रहित था और वहाँ के राजा बन गए। ययाति के दूसरे पुत्र का नाम तुर्वसु था। तुर्वसु का पुत्र वह्नि था, वह्नि का पुत्र भर्ग था और भर्ग का पुत्र भानुमान था।
The Prachetas (sons of Pracheta) occupied the northern part of India which was devoid of Vedic civilization and became kings there. Yayati's second son was Turvasu. Turvasu's son was Vahni, Vahni's son was Bharg and Bharg's son was Bhanuman.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥