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bhagavat 9.23.14: हे राजन, कर्ण का अकेला पुत्र वृषसेन था। ययाति के तीसरे पुत्र द्रुह्यु का पुत्र बभ्रु था और बभ्रु का पुत्र सेतु था।   |   bhagavat अध्याय 9.23: ययाति के पुत्रों की वंशावली   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 23: ययाति के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.23.14 
वृषसेन: सुतस्तस्य कर्णस्य जगतीपते ।
द्रुह्योश्च तनयो बभ्रु: सेतुस्तस्यात्मजस्तत: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन, कर्ण का अकेला पुत्र वृषसेन था। ययाति के तीसरे पुत्र द्रुह्यु का पुत्र बभ्रु था और बभ्रु का पुत्र सेतु था।
 
O king, the only son of Karna was Vrishasena. Yayati's third son, Druhyu, had Babhru and Babhru's son was Setu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)