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bhagavat 9.22.8: बृहद्रथ की एक अन्य पत्नी के गर्भ से एक पुत्र का जन्म हुआ जो दो आधे-आधे भागों में था। माँ ने जब उन दो हिस्सों को देखा तो उसने उन्हें अस्वीकार कर दिया, लेकिन बाद में जरा नामक एक राक्षसी ने खेल-खेल में उन्हें जोड़ते हुए कहा, "जीवित हो उठो, जीवित हो उठो!" इस प्रकार जरासंध नामक पुत्र का जन्म हुआ।   |   bhagavat अध्याय 9.22: अजमीढ के वंशज   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  9.22.8 
अन्यस्यामपि भार्यायां शकले द्वे बृहद्रथात् ।
ये मात्रा बहिरुत्सृष्टे जरया चाभिसन्धिते ।
जीव जीवेति क्रीडन्त्या जरासन्धोऽभवत् सुत: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
बृहद्रथ की एक अन्य पत्नी के गर्भ से एक पुत्र का जन्म हुआ जो दो आधे-आधे भागों में था। माँ ने जब उन दो हिस्सों को देखा तो उसने उन्हें अस्वीकार कर दिया, लेकिन बाद में जरा नामक एक राक्षसी ने खेल-खेल में उन्हें जोड़ते हुए कहा, "जीवित हो उठो, जीवित हो उठो!" इस प्रकार जरासंध नामक पुत्र का जन्म हुआ।
 
From the womb of Brihadrath's second wife, a son was born in two halves. When the mother saw these two halves, she threw them away, but later a demoness named Jara joined them together in a playful manner and said, "Come to life, come to life." In this way a son named Jarasandh was born.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)