Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.22.30-31: हे राजन, सहदेव के पुत्र का नाम श्रुतकर्मा था। इसके अतिरिक्त, युधिष्ठिर और उनके भाइयों के अन्य पत्नियों से और भी पुत्र हुए। युधिष्ठिर ने पौरवी के गर्भ से देवक को और भीमसेन ने अपनी पत्नी हिडिम्बा से घटोत्कच नामक पुत्र तथा अपनी दूसरी पत्नी काली से सर्वगत नामक पुत्रों को जन्म दिया। इसी प्रकार सहदेव को उनकी पत्नी विजया से, जो पर्वतराज की पुत्री थी, सुहोत्र नामक पुत्र प्राप्त हुआ। | bhagavat अध्याय 9.22: अजमीढ के वंशज । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन, सहदेव के पुत्र का नाम श्रुतकर्मा था। इसके अतिरिक्त, युधिष्ठिर और उनके भाइयों के अन्य पत्नियों से और भी पुत्र हुए। युधिष्ठिर ने पौरवी के गर्भ से देवक को और भीमसेन ने अपनी पत्नी हिडिम्बा से घटोत्कच नामक पुत्र तथा अपनी दूसरी पत्नी काली से सर्वगत नामक पुत्रों को जन्म दिया। इसी प्रकार सहदेव को उनकी पत्नी विजया से, जो पर्वतराज की पुत्री थी, सुहोत्र नामक पुत्र प्राप्त हुआ।
O King, Sahadeva's son was Shrutkarma. Not only this, Yudhishthira and his brothers had many more sons from their other wives. Yudhishthira begot Devaka from Pauravi's womb, Bhimasena begot Ghatotkacha from his wife Hidimba's womb and a son named Sarvagata from his other wife Kali's womb. Similarly, Sahadeva begot a son named Suhotra from his wife Vijaya. Vijaya was the daughter of the king of mountains.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥