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bhagavat 9.22.21-24: चित्रांगद, जिसका छोटा भाई विचित्रवीर्य था, चित्रागंद नाम के ही गंधर्व द्वारा मारा गया था। शान्तनु से विवाह होने के पहले ही सत्यवती ने वेदों के ज्ञाता व्यासदेव को जन्म दिया था। व्यासदेव को कृष्ण द्वैपायन के नाम से भी जाना जाता है और ये पराशर मुनि के वीर्य से उत्पन्न हुए थे। व्यासदेव से ही मेरा (शुकदेव गोस्वामी) जन्म हुआ और मैंने उनसे इस महान ग्रंथ श्रीमद्भागवत का अध्ययन किया। भगवान के अवतार वेदव्यास ने पैल इत्यादि अपने शिष्यों को छोड़कर मुझे श्रीमद्भागवत पढ़ाया क्योंकि मैं सभी भौतिक कामनाओं से मुक्त था। काशीराज की दो कन्याओं अम्बिका और अम्बालिका का जब बलपूर्वक अपहरण हो गया, तो विचित्रवीर्य ने उनसे विवाह कर लिया। लेकिन इन दोनों पत्नियों से अत्यधिक आसक्त रहने के कारण उसे तपेदिक हो गया और उसकी मृत्यु हो गई।   |   bhagavat अध्याय 9.22: अजमीढ के वंशज   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 22: अजमीढ के वंशज  »  श्लोक 21-24
 
 
श्लोक  9.22.21-24 
विचित्रवीर्यश्चावरजो नाम्ना चित्राङ्गदो हत: ।
यस्यां पराशरात् साक्षादवतीर्णो हरे: कला ॥ २१ ॥
वेदगुप्तो मुनि: कृष्णो यतोऽहमिदमध्यगाम् ।
हित्वा स्वशिष्यान् पैलादीन्भगवान् बादरायण: ॥ २२ ॥
मह्यं पुत्राय शान्ताय परं गुह्यमिदं जगौ ।
विचित्रवीर्योऽथोवाह काशीराजसुते बलात् ॥ २३ ॥
स्वयंवरादुपानीते अम्बिकाम्बालिके उभे ।
तयोरासक्तहृदयो गृहीतो यक्ष्मणा मृत: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
चित्रांगद, जिसका छोटा भाई विचित्रवीर्य था, चित्रागंद नाम के ही गंधर्व द्वारा मारा गया था। शान्तनु से विवाह होने के पहले ही सत्यवती ने वेदों के ज्ञाता व्यासदेव को जन्म दिया था। व्यासदेव को कृष्ण द्वैपायन के नाम से भी जाना जाता है और ये पराशर मुनि के वीर्य से उत्पन्न हुए थे। व्यासदेव से ही मेरा (शुकदेव गोस्वामी) जन्म हुआ और मैंने उनसे इस महान ग्रंथ श्रीमद्भागवत का अध्ययन किया। भगवान के अवतार वेदव्यास ने पैल इत्यादि अपने शिष्यों को छोड़कर मुझे श्रीमद्भागवत पढ़ाया क्योंकि मैं सभी भौतिक कामनाओं से मुक्त था। काशीराज की दो कन्याओं अम्बिका और अम्बालिका का जब बलपूर्वक अपहरण हो गया, तो विचित्रवीर्य ने उनसे विवाह कर लिया। लेकिन इन दोनों पत्नियों से अत्यधिक आसक्त रहने के कारण उसे तपेदिक हो गया और उसकी मृत्यु हो गई।
 
Chitrangada, whose younger brother was Vichitravirya, was killed by a Gandharva named Chitrangada. Before Satyavati married Shantanu, she gave birth to Vyasa, a knower of the Vedas. He was called Krishna Dwaipayana and was born from the semen of sage Parashara. I (Sukadeva Goswami) was born from Vyasa and I studied this great book Shrimad Bhagavata from him. Vedavyasa, the incarnation of God, taught me Shrimad Bhagavata leaving behind his disciples like Paila etc. because I was free from all material desires. When the two daughters of the King of Kashi, Ambika and Ambalika, were forcibly abducted, Vichitravirya married them, but being too attached to both his wives, he got tuberculosis from which he died.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)