Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.22.16-17: जब ब्राह्मणों ने यह कहा, तो महाराज शान्तनु वन में चले गए और अपने बड़े भाई देवापि से प्रार्थना की कि वे राज्य का भार ग्रहण करें, क्योंकि प्रजा का पालन करना राजा का धर्म है। परन्तु, इसके पूर्व शान्तनु के मंत्री अश्ववार ने कुछ ब्राह्मणों को बहकाकर देवापि से वेदों के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए प्रेरित किया था, जिससे वे शासक पद के अयोग्य हो चुके थे। ब्राह्मणों ने देवापि को वैदिक सिद्धान्तों के मार्ग से विचलित कर दिया था, अतः जब शान्तनु ने शासक पद ग्रहण करने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इसके विपरीत, वे वैदिक सिद्धान्तों की निन्दा करने लगे और इस प्रकार पतित हो गये। ऐसी परिस्थिति में शान्तनु फिर से राजा बन गये और इन्द्र ने प्रसन्न होकर वर्षा की। बाद में, देवापि ने अपने मन और इन्द्रियों के निग्रह के लिए योग का मार्ग अपनाया और कलापग्राम नामक ग्राम को चले गए, जहाँ वे आज भी जीवित हैं। | bhagavat अध्याय 9.22: अजमीढ के वंशज । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब ब्राह्मणों ने यह कहा, तो महाराज शान्तनु वन में चले गए और अपने बड़े भाई देवापि से प्रार्थना की कि वे राज्य का भार ग्रहण करें, क्योंकि प्रजा का पालन करना राजा का धर्म है। परन्तु, इसके पूर्व शान्तनु के मंत्री अश्ववार ने कुछ ब्राह्मणों को बहकाकर देवापि से वेदों के आदेशों का उल्लंघन करने के लिए प्रेरित किया था, जिससे वे शासक पद के अयोग्य हो चुके थे। ब्राह्मणों ने देवापि को वैदिक सिद्धान्तों के मार्ग से विचलित कर दिया था, अतः जब शान्तनु ने शासक पद ग्रहण करने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। इसके विपरीत, वे वैदिक सिद्धान्तों की निन्दा करने लगे और इस प्रकार पतित हो गये। ऐसी परिस्थिति में शान्तनु फिर से राजा बन गये और इन्द्र ने प्रसन्न होकर वर्षा की। बाद में, देवापि ने अपने मन और इन्द्रियों के निग्रह के लिए योग का मार्ग अपनाया और कलापग्राम नामक ग्राम को चले गए, जहाँ वे आज भी जीवित हैं।
When the Brahmins said this, Maharaj Shantanu went to the forest and requested his elder brother Devaapi to take over the kingdom as it is the duty of a king to take care of his subjects. But before this, Shantanu's minister Ashvavara had induced Devaapi to violate the orders of the Vedas by instigating some Brahmins, which made him unfit to be a ruler. The Brahmins had turned Devaapi away from the path of Vedic principles, so when Shantanu asked him to take over the throne, he refused. On the contrary, he started criticizing the Vedic principles and hence fell down. In such circumstances, Shantanu again became the king and Indra was pleased and rained. Later, Devaapi followed the path of yoga to subdue his mind and senses and he went to a village called Kalapagram where he is still alive.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥