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bhagavat 9.21.8: जब शूद्र चला गया, तो कुत्तों से घिरा हुआ एक और मेहमान आया और कहा, "हे राजा, मैं और मेरा कुत्तों का झुंड बहुत भूखे हैं। कृपया हमें कुछ खाने को दें।"   |   bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 21: भरत का वंश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  9.21.8 
याते शूद्रे तमन्योऽगादतिथि: श्वभिरावृत: ।
राजन् मे दीयतामन्नं सगणाय बुभुक्षते ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
जब शूद्र चला गया, तो कुत्तों से घिरा हुआ एक और मेहमान आया और कहा, "हे राजा, मैं और मेरा कुत्तों का झुंड बहुत भूखे हैं। कृपया हमें कुछ खाने को दें।"
 
When the Shudra left, another guest came with dogs. He said, “O King, I and the dogs with me are very hungry. Please give us something to eat.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)