इसके पश्चात, शेष भोजन को अपने कुटुंबियों में बाँट देने के बाद रन्तिदेव अपना हिस्सा खाने जा ही रहे थे कि एक शूद्र अतिथि वहाँ आ पहुँचा। उस शूद्र को परमेश्वर से जुड़ा हुआ देखकर राजा रन्तिदेव ने उसे भी भोजन में से एक भाग दिया।
After that, after distributing the remaining food among his family members, Rantidev was about to eat his share when a Shudra guest arrived there. Seeing this Shudra related to God, King Rantidev gave him a portion of the food too.
तात्पर्य
क्योंकि राजा रन्तिदेव ने प्रत्येक को भगवान का अंश माना, उन्होंने कभी ब्राह्मण और शूद्र, गरीब और अमीर में कोई भेद नहीं किया। ऐसी समान दृष्टि को सम-दर्शिनः (पण्डिताः सम-दर्शिनः) कहा गया है। जो यह समझ लेता है कि भगवान प्रत्येक के हृदय में निवास करते हैं और प्रत्येक जीव भगवान का अंश है, वह ब्राह्मण और शूद्र, गरीब (दारिद्र) और अमीर (धनी) में कोई भेद नहीं करता है। ऐसा व्यक्ति प्रत्येक जीव को समान रूप से देखता है और उनके साथ समान रूप से व्यवहार करता है, बिना किसी भेदभाव के।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥