Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.21.36: जब महाराज शान्तनु शिकार करने गये तब उन्होंने जंगल में पड़े जुड़वाँ बच्चों को देखा। करूणा के वशीभूत होकर वे उन्हें अपने साथ घर ले आये। परिणामस्वरूप, बालक को कृप नाम दिया गया और बालिका को कृपी नाम दिया गया। बाद में कृपी द्रोणाचार्य की पत्नी बनी। | bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तद् दृष्ट्वा कृपयागृह्णाच्छान्तनुर्मृगयां चरन् ।
कृप: कुमार: कन्या च द्रोणपत्न्यभवत्कृपी ॥ ३६ ॥
अनुवाद
जब महाराज शान्तनु शिकार करने गये तब उन्होंने जंगल में पड़े जुड़वाँ बच्चों को देखा। करूणा के वशीभूत होकर वे उन्हें अपने साथ घर ले आये। परिणामस्वरूप, बालक को कृप नाम दिया गया और बालिका को कृपी नाम दिया गया। बाद में कृपी द्रोणाचार्य की पत्नी बनी।
When Maharaja Shantanu went hunting, he saw twin babies lying in the forest. Out of compassion, he brought them home. As a result, the boy became famous as Kripa and the girl was named Kripi. Kripi later became the wife of Dronacharya.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध नौ के अंतर्गत इक्कीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥