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bhagavat 9.21.35: शतानंद के पुत्र सत्यधृति थे, जो तीरंदाजी में निपुण थे। सत्यधृति के पुत्र शरद्वान हुए। जब शरद्वान की उर्वशी से मुलाकात हुई तो शर नामक घास के गुच्छे पर उसका वीर्यपात हो गया। इस वीर्य से दो शुभ संतानें पैदा हुईं, एक लड़का और दूसरी लड़की।   |   bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 21: भरत का वंश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.21.35 
तस्य सत्यधृति: पुत्रो धनुर्वेदविशारद: ।
शरद्वांस्तत्सुतो यस्मादुर्वशीदर्शनात् किल ।
शरस्तम्बेऽपतद् रेतो मिथुनं तदभूच्छुभम् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
शतानंद के पुत्र सत्यधृति थे, जो तीरंदाजी में निपुण थे। सत्यधृति के पुत्र शरद्वान हुए। जब शरद्वान की उर्वशी से मुलाकात हुई तो शर नामक घास के गुच्छे पर उसका वीर्यपात हो गया। इस वीर्य से दो शुभ संतानें पैदा हुईं, एक लड़का और दूसरी लड़की।
 
Satanand's son was Satyadhriti who was very adept in archery. Satyadhriti's son was Sharadwan. When Sharadwan met Urvashi, he ejaculated on a bunch of grass called Shar. From this semen, two auspicious children were born, one of whom was a boy and the other a girl.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)