श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 21: भरत का वंश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  9.21.18 
तत्प्रसङ्गानुभावेन रन्तिदेवानुवर्तिन: ।
अभवन् योगिन: सर्वे नारायणपरायणा: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग राजा रन्तिदेव के बतायें सिद्धान्तों का अनुसरण किया, उन सबों को उनकी कृपा प्राप्त हुई और वे भगवान् नारायण के शुद्ध भक्त बन गये। इस तरह वे सभी श्रेष्ठ योगी बन गये।
 
All those who followed the principles of King Rantidev were blessed with his grace and became pure devotees of Lord Narayana. Thus, all of them became great Yogis.
तात्पर्य
सर्वोत्तम योगी या रहस्यवादी भक्त होते हैं, जैसा कि भगवान ने स्वयं भगवद्-गीता (6.47) में पुष्टि की है:

यो गीनाम् अपि सर्वे

मद्-गतनान्तरात्मना

श्रद्घावान भजते यो माँ

स मे युक्ततमो मतः

"सभी योगियों में वह जो हमेशा अत्यधिक विश्वास के साथ मेरे में निवास करता है, और मुझे अत्यधिक प्रेममयी सेवा में पूजता है, और वह योग में मुझसे अत्यधिक एकात्मक रूप से जुड़ा है और वह सभी में श्रेष्ठ है।" सर्वोत्तम योगी वह है जो लगातार ईश्वरीय व्यक्तित्व को ह्रदय के कोर में मानता है। क्योंकि रन्तिदेव राजा थे, राज्य में प्रमुख कार्यकारी, इसलिए राज्य के सभी निवासी रन्तिदेव द्वारा ईश्वरीय व्यक्तित्व के भक्त बन गए, नारायण भक्त बन गए। यह एक शुद्ध भक्त का प्रभाव है। यदि एक शुद्ध भक्त है, तो उसका संग सैंकड़ों और हज़ारों शुद्ध भक्त बना सकता है। श्रील भक्तिविनोद ठाकुर ने कहा है कि एक वैष्णव उतना ही पुण्यवान है, जितने भक्तों को वह बनाता है। एक वैष्णव केवल शब्दों के बाजीगरी से श्रेष्ठ नहीं बनता है, बल्कि भगवान के लिए बनाए गए भक्तों की संख्या से श्रेष्ठ बनता है। यहाँ शब्द रन्तिदेवानुवर्तनः इंगित करता है कि रन्तिदेव के अधिकारी, मित्र, रिश्तेदार और प्रजा सभी उनके संग से प्रथम श्रेणी के वैष्णव बन गए। दूसरे शब्दों में, यहाँ रन्तिदेव को प्रथम श्रेणी का भक्त या महा-भागवत माना गया है। महत्-सेवाँ द्वारम आहुर विमुकतेः: कुछ महात्माओं को सेवा प्रदान करनी चाहिए, क्योंकि तब व्यक्ति मुक्ति के लक्ष्य को स्वतः ही प्राप्त कर लेगा। श्रील नरोट्टम दास ठाकुर ने भी कहा है कि छड़िया वैष्णव-सेवा निस्तार पाए चे केबा: कोई भी खुद के प्रयास से मुक्त नहीं हो सकता है, लेकिन अगर कोई शुद्ध वैष्णव के अधीन हो जाता है, तो मुक्ति का द्वार खुला रहता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)