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bhagavat 9.21.14: इस प्रकार कहते हुए राजा रन्तिदेव ने प्यास में व्याकुल होकर प्राण त्यागने की स्थिति में होने पर भी बिना किसी संकोच के अपना जल उस चाण्डाल को दे दिया क्योंकि राजा स्वभाव से दयालु और शांत था।   |   bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 21: भरत का वंश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.21.14 
इति प्रभाष्य पानीयं म्रियमाण: पिपासया ।
पुल्कसायाददाद्धीरो निसर्गकरुणो नृप: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कहते हुए राजा रन्तिदेव ने प्यास में व्याकुल होकर प्राण त्यागने की स्थिति में होने पर भी बिना किसी संकोच के अपना जल उस चाण्डाल को दे दिया क्योंकि राजा स्वभाव से दयालु और शांत था।
 
Saying this, King Rantidev, who was dying of thirst, gave his share of water to the Chandala without any hesitation because the king was very kind and calm by nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)