Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.21.13: इस दयनीय चाण्डाल के जीवन को बनाए रखने के लिए उसे अपना पानी देकर, जो जीवन के लिए जूझ रहा था, मैं सभी भूख, प्यास, थकान, शरीर के काँपने, चिड़चिड़ापन, कष्ट, पीड़ा और भ्रम से मुक्त हो गया हूँ। | bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस दयनीय चाण्डाल के जीवन को बनाए रखने के लिए उसे अपना पानी देकर, जो जीवन के लिए जूझ रहा था, मैं सभी भूख, प्यास, थकान, शरीर के काँपने, चिड़चिड़ापन, कष्ट, पीड़ा और भ्रम से मुक्त हो गया हूँ।
By giving my water to save the life of the poor Chandala struggling for his life, I have become free from all hunger, thirst, fatigue, bodily tremors, sadness, pain, anguish and attachment.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥