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bhagavat 9.21.10: इसके बाद, केवल पीने का पानी बचा था जो एक व्यक्ति को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त था। पर जब राजा पानी पीने ही वाला था कि एक चांडाल वहाँ आ गया और उसने कहा, “हे राजा, मैं नीच जाति का हूँ। कृपा करके मुझे पीने के लिए थोड़ा पानी दें।”   |   bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 21: भरत का वंश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.21.10 
पानीयमात्रमुच्छेषं तच्चैकपरितर्पणम् ।
पास्यत: पुल्कसोऽभ्यागादपो देह्यशुभाय मे ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, केवल पीने का पानी बचा था जो एक व्यक्ति को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त था। पर जब राजा पानी पीने ही वाला था कि एक चांडाल वहाँ आ गया और उसने कहा, “हे राजा, मैं नीच जाति का हूँ। कृपा करके मुझे पीने के लिए थोड़ा पानी दें।”
 
After that only drinking water was left which was sufficient to satisfy only one person. But as soon as the king was about to drink water, a Chandala came there and said, "O king, I am born in a low caste. Kindly give me some water to drink."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)