Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.21.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: मरुद्गणों द्वारा लाकर दिए जाने के कारण भरद्वाज का नाम वितथ हुआ। वितथ का पुत्र मन्यु था, जिसके पाँच पुत्र थे - बृहत्क्षत्र, जय, महावीर्य, नर और गर्ग। इन पाँचों में से नर के पुत्र का नाम संकृति था। | bhagavat अध्याय 9.21: भरत का वंश । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: मरुद्गणों द्वारा लाकर दिए जाने के कारण भरद्वाज का नाम वितथ हुआ। वितथ का पुत्र मन्यु था, जिसके पाँच पुत्र थे - बृहत्क्षत्र, जय, महावीर्य, नर और गर्ग। इन पाँचों में से नर के पुत्र का नाम संकृति था।
Sukadeva Goswami said: Since the Marutganas brought Bharadwaj, he was called Vitatha. Vitatha's son was Manyu, who had five sons—Brihatkshatra, Jaya, Mahaveerya, Nara and Garga. Of these five, Nara's son was named Sankriti.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥