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bhagavat 9.20.14: हे कमल की पंखुड़ियों जैसी आँखों वाले राजन, कृपया बैठिए और हमारे यथासंभव आतिथ्य को स्वीकार कीजिए। हमारे पास नीवार चावल हैं जिन्हें आप कृपा करके ग्रहण कर सकते हैं और यदि आप चाहें तो बिना किसी हिचक के यहाँ रुक सकते हैं।   |   bhagavat अध्याय 9.20: पूरु का वंश   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 20: पूरु का वंश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  9.20.14 
आस्यतां ह्यरविन्दाक्ष गृह्यतामर्हणं च न: ।
भुज्यतां सन्ति नीवारा उष्यतां यदि रोचते ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
हे कमल की पंखुड़ियों जैसी आँखों वाले राजन, कृपया बैठिए और हमारे यथासंभव आतिथ्य को स्वीकार कीजिए। हमारे पास नीवार चावल हैं जिन्हें आप कृपा करके ग्रहण कर सकते हैं और यदि आप चाहें तो बिना किसी हिचक के यहाँ रुक सकते हैं।
 
O lotus-eyed king, please sit down and accept our hospitality as best you can. We have Nivar rice which you may take and if you like, you may stay here without any hesitation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)