व्यक्तं राजन्यतनयां वेद्म्यहं त्वां सुमध्यमे ।
न हि चेत: पौरवाणामधर्मे रमते क्वचित् ॥ १२ ॥
अनुवाद
हे अति सुंदर नारी, मेरे मन में यह विचार आ रहा है कि तुम किसी क्षत्रिय की पुत्री हो। क्योंकि मैं पूरुवंश में जन्मा हूँ, इसलिए मेरा मन कभी भी अधार्मिक तरीके से किसी भी चीज़ का भोग करने का प्रयास नहीं करता।
O extremely beautiful lady, it appears to me that you are the daughter of a Kshatriya. Since I belong to the Puru dynasty, my mind never tries to enjoy anything in an unrighteous manner.
तात्पर्य
महाराज दुष्यंत ने साकुंतला से विवाह करने की अपनी इच्छा परोक्ष रूप से व्यक्त की क्योंकि उनके मन में यह आ गया था कि वह किसी क्षत्रिय राजा की पुत्री होगी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥