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श्लोक 9.2.5-6  |
एकां जग्राह बलवान् सा चुक्रोश भयातुरा ।
तस्यास्तु क्रन्दितं श्रुत्वा पृषध्रोऽनुससार ह ॥ ५ ॥
खड्गमादाय तरसा प्रलीनोडुगणे निशि ।
अजानन्नच्छिनोद् बभ्रो: शिर: शार्दूलशङ्कया ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब एक बहुत ताकतवर बाघ ने एक गाय को पकड़ लिया तो डरकर गाय चिल्लाने लगी। पृषध्र ने यह चीख सुनी और तुरंत उस आवाज के पीछे भागने लगा। उसने अपनी तलवार निकाली, पर बादलों के कारण अंधेरा था और मानों इन तारों ने पृषध्र का साथ दिया हो। न जाने किस भ्रम में उसे गाय बाघ दिखाई पड़ी और उसने गाय का सिर बहुत जोर से काट दिया। |
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| जब एक बहुत ताकतवर बाघ ने एक गाय को पकड़ लिया तो डरकर गाय चिल्लाने लगी। पृषध्र ने यह चीख सुनी और तुरंत उस आवाज के पीछे भागने लगा। उसने अपनी तलवार निकाली, पर बादलों के कारण अंधेरा था और मानों इन तारों ने पृषध्र का साथ दिया हो। न जाने किस भ्रम में उसे गाय बाघ दिखाई पड़ी और उसने गाय का सिर बहुत जोर से काट दिया। |
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