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bhagavat 9.2.4: एक बार की बात है, रात्रि में, जब वर्षा हो रही थी, एक बाघ गोशाला में घुस आया। उसे देखकर भूमि में लेटी हुई सारी गाएँ डर के मारे खड़ी हो गईं और गोशाला में इधर-उधर भाग गईं।   |   bhagavat अध्याय 9.2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.2.4 
एकदा प्राविशद् गोष्ठं शार्दूलो निशि वर्षति ।
शयाना गाव उत्थाय भीतास्ता बभ्रमुर्व्रजे ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
एक बार की बात है, रात्रि में, जब वर्षा हो रही थी, एक बाघ गोशाला में घुस आया। उसे देखकर भूमि में लेटी हुई सारी गाएँ डर के मारे खड़ी हो गईं और गोशाला में इधर-उधर भाग गईं।
 
Once at night, when it was raining, a tiger entered the cowshed. Seeing him, all the cows lying on the ground stood up in fear and scattered in the cowshed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)