Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.2.10: जब गुरु ने वीर पृषध्र को शाप दे दिया तो उन्होंने हाथ जोड़कर उस शाप को स्वीकार कर लिया। फिर, अपनी इन्द्रियों को वश में करके उन्होंने सभी महान ऋषियों द्वारा अनुमोदित ब्रह्मचर्य व्रत ले लिया। | bhagavat अध्याय 9.2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं शप्तस्तु गुरुणा प्रत्यगृह्णात् कृताञ्जलि: ।
अधारयद् व्रतं वीर ऊर्ध्वरेता मुनिप्रियम् ॥ १० ॥
अनुवाद
जब गुरु ने वीर पृषध्र को शाप दे दिया तो उन्होंने हाथ जोड़कर उस शाप को स्वीकार कर लिया। फिर, अपनी इन्द्रियों को वश में करके उन्होंने सभी महान ऋषियों द्वारा अनुमोदित ब्रह्मचर्य व्रत ले लिया।
When the brave Prishdhra was cursed in this manner by his Guru, he accepted the curse with folded hands. Thereafter, controlling his senses, he took the vow of celibacy as approved by all the sages.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥