Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.2.1: शुकदेव गोस्वामी बोले: तत्पश्चात, जब उनके पुत्र सुद्युम्न वानप्रस्थ आश्रम ग्रहण करने के लिए जंगल में चले गए, तो वैवस्वत मनु (श्राद्धदेव) ने अधिक पुत्र प्राप्त करने की इच्छा से यमुना नदी के तट पर सौ वर्षों तक कठोर तपस्या की। | bhagavat अध्याय 9.2: मनु के पुत्रों की वंशावलियाँ । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
एवं गतेऽथ सुद्युम्ने मनुर्वैवस्वत: सुते ।
पुत्रकामस्तपस्तेपे यमुनायां शतं समा: ॥ १ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी बोले: तत्पश्चात, जब उनके पुत्र सुद्युम्न वानप्रस्थ आश्रम ग्रहण करने के लिए जंगल में चले गए, तो वैवस्वत मनु (श्राद्धदेव) ने अधिक पुत्र प्राप्त करने की इच्छा से यमुना नदी के तट पर सौ वर्षों तक कठोर तपस्या की।
Sukadeva Goswami said: Thereafter, when Sudyumna, the son of Vaivasvata Manu (Shraddhadeva), went to the forest to adopt the Vanaprastha stage, Manu, desirous of having more progeny, performed severe austerities for one hundred years on the bank of the river Yamuna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥