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bhagavat 9.19.7: जब उस बकरी ने, जो कुएं में गिरी थी, अपने प्रियतम बकरे को किसी दूसरी बकरी के साथ मैथुन करते हुए देखा तो वह बकरे की इस हरकत को बर्दाश्त नहीं कर पाई।   |   bhagavat अध्याय 9.19: राजा ययाति को मुक्ति-लाभ   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 19: राजा ययाति को मुक्ति-लाभ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.19.7 
तमेव प्रेष्ठतमया रममाणमजान्यया ।
विलोक्य कूपसंविग्ना नामृष्यद् बस्तकर्म तत् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
जब उस बकरी ने, जो कुएं में गिरी थी, अपने प्रियतम बकरे को किसी दूसरी बकरी के साथ मैथुन करते हुए देखा तो वह बकरे की इस हरकत को बर्दाश्त नहीं कर पाई।
 
When the goat that had fallen into the well saw that her beloved goat was mating with another goat, she could not tolerate this action of the goat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)