श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 19: राजा ययाति को मुक्ति-लाभ  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  9.19.5-6 
सोत्तीर्य कूपात् सुश्रोणी तमेव चकमे किल ।
तया वृतं समुद्वीक्ष्य बह्व्योऽजा: कान्तकामिनी: ॥ ५ ॥
पीवानं श्मश्रुलं प्रेष्ठं मीढ्‍वांसं याभकोविदम् ।
स एकोऽजवृषस्तासां बह्वीनां रतिवर्धन: ।
रेमे कामग्रहग्रस्त आत्मानं नावबुध्यत ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
जब सुन्दर पुट्ठों वाली बकरी कुएँ से बाहर आ गई और उसने अत्यन्त सुन्दर बकरे को देखा तो उसने उसे अपना पति बनाना चाहा। जब उसने ऐसा कर लिया तो अन्य अनेक बकरियों ने भी उस बकरे को अपना पति बनाना चाहा क्योंकि उसका शारीरिक गठन अत्यन्त सुन्दर था, उसकी मूँछ तथा दाढ़ी सुन्दर थी और वह वीर्यस्खलन करने तथा संभोग कला में पटु था। अतएव, जिस तरह भूत से सताया गया मनुष्य पागलपन दिखलाता है उसी तरह वह श्रेष्ठ बकरा अनेक बकरियों से आकृष्ट होकर तथा अश्लील कार्यों में लिप्त रहने के कारण आत्म-साक्षात्कार के अपने असली कार्य को भूल गया।
 
When the goat with the beautiful buttocks came out of the well and saw the very handsome male goat, she wanted to make him her husband. When she did so, many other goats also wanted to make him their husband because he had a very beautiful physique, he had beautiful moustache and beard and he was adept in ejaculating and in the art of sex. Therefore, just as a man tormented by a ghost acts crazy, similarly that excellent goat, being attracted to many goats and being engaged in obscene acts, forgot his real task of self-realization.
तात्पर्य
भौतिकवादी निश्चित ही बहुत अधिक यौन संबंध में आकर्षित होते हैं। यद् द्वन्द्वमयमिव कुतोऽस्य सुखं स्याद् अथवा या मध्यमिकाः सुखेन जीवन्ति नोपलभ्यते वा। यद्यपि व्यक्ति गृहस्थ या गृहस्वामी बनता है, वह अपने हृदय की सामग्री के लिए यौन जीवन का आनंद लेता है, वह कभी संतुष्ट नहीं होता है। ऐसा कामुक भौतिकवादी बकरे की तरह है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि यदि वध के लिए बकरियों को मौका मिले, तो मारे जाने से पहले वे यौन सुख का आनंद लेते हैं। हालाँकि, मनुष्य का मतलब आत्म-साक्षात्कार है।

तपो दिव्यं पुत्रका येन सत्त्वं

शुद्ध्येद यस्माद् ब्रह्म-सौख्यं त्व अनन्तं

मानव जीवन शरीर में आध्यात्मिक आत्मा (देहिनोऽस म यथा देहे) के आत्म-साक्षात्कार के लिए है। एक भौतिकवादी बदमाश यह नहीं जानता कि वह शरीर नहीं है बल्कि शरीर के भीतर एक आध्यात्मिक आत्मा है। हालाँकि, किसी को भी उसकी वास्तविक स्थिति को समझना चाहिए और ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जिससे शारीरिक उलझन से मुक्त हो सके। उस दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्ति की तरह जो पागलों की तरह काम करता है, भूत-प्रेतों द्वारा प्रेतवाधित, वासना के भूत द्वारा प्रेतवाधित भौतिकवादी अपने वास्तविक व्यवसाय को भूल जाता है ताकि वह जीवन की शारीरिक अवधारणा में तथाकथित खुशी का आनंद ले सके।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)