जंगल में भटकते हुए, अपनी इंद्रियों को तृप्त करने के लिए चरता बकरा संयोग से एक कुएं के पास पहुंचा, जिसमें उसने एक बकरी को असहाय रूप से खड़ा देखा, जो अपने कर्मों के फलस्वरूप कुएं में गिर गई थी।
A goat, while roaming in the forest in search of food to satisfy his senses, suddenly came to a well inside which he saw another goat standing helplessly, which had fallen into the well due to the effect of its own Sakaam Karma.
तात्पर्य
यहाँ महाराज ययाति स्वयं की तुलना एक नर-बकरी और देवयानी की तुलना मादा-बकरी से करते हैं और एक पुरूष तथा स्त्री के गुणों का वर्णन करते हैं| एक नर-बकरी की भांति एक पुरूष इधर-उधर भटकते हुए काम-सुख की तलाश में रहता है, और एक नर की या पति की देखरेख के बिना एक स्त्री उस मादा-बकरी के समान होती है जो एक कुएँ में गिर गयी हो| एक पुरूष द्वारा देखभाल किये बिना एक स्त्री सुखी नहीं हो सकती| वस्तुतः, वह उस मादा-बकरी के समान होती है जो एक कुएँ में गिर गयी हो और जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रही हो| अतः एक स्त्री को अपने पिता के शरण में रहना चाहिए, जैसे देवयानी ने शुक्राचार्य की देखरेख में रहकर किया था, और फिर पिता को अपनी पुत्री का विवाह एक योग्य पुरूष के साथ करना चाहिए, या एक योग्य पुरूष को स्त्री की सहायता करनी चाहिए, और उसे एक पति की देखरेख में रखना चाहिए| देवयानी के जीवन द्वारा इसे दृष्टांत के रूप में दिखाया गया है| जब राजा ययाति ने देवयानी को कुएँ से निकाला, उसे बहुत राहत मिली और उसने ययाति से विनती की कि वह मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें| लेकिन जब महाराज ययाति ने देवयानी को स्वीकार किया, तो वे उनसे बहुत अधिक आसक्त हो गए और न केवल उनके साथ, बल्कि शर्मिष्ठा जैसी अन्य महिलाओं के साथ भी शारीरिक संबंध बनाए| फिर भी वे असंतुष्ट ही रहे| अतः एक व्यक्ति को ययाति जैसे पारिवारिक जीवन से जबरन निवृत्त हो जाना चाहिए| जब किसी व्यक्ति को संसारी पारिवारिक जीवन की निम्न प्रकृति के बारे में पूर्ण रूप से विश्वास हो जाता है, तो उसे इस जीवन-शैली का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए, सन्यास ग्रहण कर लेना चाहिए, और स्वयं को पूर्ण रूप से भगवान की सेवा में लगा देना चाहिए| तभी उसका जीवन सफल होगा|
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)