Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.19.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे महाराज परीक्षित, ययाति स्त्री पर अत्यधिक आसक्त थे। किंतु समय बीतने के साथ, जब वह कामुक भोगों और उसके बुरे प्रभावों से ऊब गए, तो उन्होंने इस जीवनशैली को त्याग दिया और अपनी प्रिय पत्नी को निम्नलिखित कहानी सुनाई। | bhagavat अध्याय 9.19: राजा ययाति को मुक्ति-लाभ । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
स इत्थमाचरन् कामान् स्त्रैणोऽपह्नवमात्मन: ।
बुद्ध्वा प्रियायै निर्विण्णो गाथामेतामगायत ॥ १ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: हे महाराज परीक्षित, ययाति स्त्री पर अत्यधिक आसक्त थे। किंतु समय बीतने के साथ, जब वह कामुक भोगों और उसके बुरे प्रभावों से ऊब गए, तो उन्होंने इस जीवनशैली को त्याग दिया और अपनी प्रिय पत्नी को निम्नलिखित कहानी सुनाई।
Sukadeva Goswami said: O Maharaja Pariksit, Yayati was very much in love with a woman. But when in course of time he became tired of sensual pleasures and their evil effects, he gave up this way of life and told the following story to his beloved wife.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥