Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.18.6-7: शुकदेव गोस्वामी ने कहा : एक बार वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा, जो भोली-भाली थी लेकिन स्वभाव से ही क्रोधी थी, शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और सैकड़ों सहेलियों के साथ राजमहल के बगीचे में टहल रही थी। यह बगीचा कमल और फूलों-फलों के पेड़ों से भरा हुआ था और इसमें मीठे गाने वाले पक्षी और भौंरे रहते थे। | bhagavat अध्याय 9.18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
एकदा दानवेन्द्रस्य शर्मिष्ठा नाम कन्यका ।
सखीसहस्रसंयुक्ता गुरुपुत्र्या च भामिनी ॥ ६ ॥
देवयान्या पुरोद्याने पुष्पितद्रुमसङ्कुले ।
व्यचरत्कलगीतालिनलिनीपुलिनेऽबला ॥ ७ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा : एक बार वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा, जो भोली-भाली थी लेकिन स्वभाव से ही क्रोधी थी, शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी और सैकड़ों सहेलियों के साथ राजमहल के बगीचे में टहल रही थी। यह बगीचा कमल और फूलों-फलों के पेड़ों से भरा हुआ था और इसमें मीठे गाने वाले पक्षी और भौंरे रहते थे।
Shukdeva Goswami said: Once Sharmishtha, the daughter of Vrishparva, who was innocent but short-tempered by nature, was roaming in the garden of the royal palace with Devayani, the daughter of Shukracharya and her hundreds of friends. This garden was full of lotus flowers and fruit trees and sweet singing birds and bumble bees were living in it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥