महाराज ययाति ने निष्काम भाव के साथ भगवान की आराधना की जो हर एक के दिल में नारायण के रूप में मौजूद हैं। भगवान सर्वव्यापी हैं परंतु वे भौतिक आंखों से नहीं देखे जा सकते हैं।
Maharaja Yayati worshiped the Lord with selfless devotion, who resides in the form of Narayana in everyone's heart and who is invisible to the eyes even though he is present everywhere.
तात्पर्य
राजा ययाति बाहरी तौर पर भौतिक सुविधाओं के बहुत शौकीन थे पर भीतर से वह भगवान के अनंत दास बनने की ही सोचते रहते थें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥