राजा ययाति ने कहा: "हे विद्वान और पूजनीय ब्राह्मण, अभी भी तुम्हारी पुत्री के साथ मेरी वासना पूरी नहीं हुई है।" तब शुक्राचार्य ने जवाब दिया, "तुम चाहो तो अपने बुढ़ापे को किसी ऐसे व्यक्ति से बदल दो जो तुम्हें अपनी जवानी देने के लिए सहमत हो।"
King Yayati said: “Oh learned and revered Brahmin, my sexual desires with your daughter are still not satisfied.” Then Shukracharya replied, “If you want, you can exchange your old age with someone who is willing to give you his youth.”
तात्पर्य
जब राजा ययाति ने कहा कि उन्होंने अभी तक शुक्राचार्य की बेटी के साथ अपनी वासनापूर्ण इच्छाओं को संतुष्ट नहीं किया है, तो शुक्राचार्य ने देखा कि ययाति के लिए बुढ़ापे और अमान्यता में बने रहना उनकी अपनी बेटी के हितों के खिलाफ था, क्योंकि निश्चित रूप से उनकी कामुक बेटी संतुष्ट नहीं होगी। इसलिए शुक्राचार्य ने अपने दामाद को यह कहकर आशीर्वाद दिया कि वह अपने बुढ़ापे को किसी और की जवानी से बदल सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि ययाति का पुत्र ययाति के बुढ़ापे के बदले अपनी जवानी बदल देगा, तो ययाति देवयानी के साथ यौन संबंध का आनंद लेना जारी रख सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥