Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.18.30: जब शुक्राचार्य ने ययाति के साथ देवयानी का विवाह कर दिया, तो उसने शर्मिष्ठा के उसके साथ जाने की अनुमति तो दी, लेकिन राजा को चेतावनी दी, "हे राजा, इस कन्या शर्मिष्ठा को कभी भी अपनी शय्या साझा करने की अनुमति न देना।" | bhagavat अध्याय 9.18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाहुषाय सुतां दत्त्वा सह शर्मिष्ठयोशना ।
तमाह राजञ्छर्मिष्ठामाधास्तल्पे न कर्हिचित् ॥ ३० ॥
अनुवाद
जब शुक्राचार्य ने ययाति के साथ देवयानी का विवाह कर दिया, तो उसने शर्मिष्ठा के उसके साथ जाने की अनुमति तो दी, लेकिन राजा को चेतावनी दी, "हे राजा, इस कन्या शर्मिष्ठा को कभी भी अपनी शय्या साझा करने की अनुमति न देना।"
When Shukracharya married Devayani to Yayati, he allowed Sharmishtha to go with her but warned the king, “O King, never allow this Sharmishtha to sleep with you in your bed.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥