Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.18.26: राजा वृषपर्वा को ज्ञात था कि शुक्राचार्य उन्हें दंडित करने या श्राप देने के लिए आ रहे हैं। इसलिए, शुक्राचार्य के महल में आने से पहले, वृषपर्वा बाहर चले गए और रास्ते में ही अपने गुरु के चरणों में गिर पड़े और उनके क्रोध को शांत करते हुए उन्हें प्रसन्न किया। | bhagavat अध्याय 9.18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा वृषपर्वा को ज्ञात था कि शुक्राचार्य उन्हें दंडित करने या श्राप देने के लिए आ रहे हैं। इसलिए, शुक्राचार्य के महल में आने से पहले, वृषपर्वा बाहर चले गए और रास्ते में ही अपने गुरु के चरणों में गिर पड़े और उनके क्रोध को शांत करते हुए उन्हें प्रसन्न किया।
King Vrishparva understood that Shukracharya was coming to harass or curse him. As a result, before Shukracharya could come to his palace, Vrishparva came out and fell at the feet of his Guru on the way and appeased him by stopping his anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥