शुकदेव गोस्वामी ने कहा : चूँकि वेदों में इस तरह के विवाह का वर्णन नहीं है, इसलिए राजा ययाति को यह अच्छा नहीं लगा, परंतु विधाता द्वारा इसकी व्यवस्था होने से और देवयानी के सौंदर्य के प्रति आकर्षित होने से उन्होंने देवयानी की प्रार्थना स्वीकार कर ली।
Sukadeva Goswami continued: Since the scriptures do not permit such a marriage, King Yayati did not like it, but because it was arranged by Providence and he was attracted by Devayani's beauty, he accepted her request.
तात्पर्य
वैदिक प्रणाली के अनुसार, माता-पिता विवाह करने वाले लड़के और लड़की की जन्मकुंडली मिलाते थे। यदि ज्योतिषीय गणना के अनुसार लड़का और लड़की हर दृष्टि से अनुकूल होते थे, तो उस जोड़े को यौतक कहते थे और विवाह स्वीकार किया जाता था। पचास साल पहले भी, यह प्रणाली हिंदू समाज में प्रचलित थी। लड़के की संपन्नता या लड़की की सुंदरता की परवाह किए बिना, इस ज्योतिषीय अनुकूलता के बिना विवाह नहीं होता था। व्यक्ति तीन श्रेणियों में जन्म लेता है, जिन्हें देव-गण, मनुष्य-गण और राक्षस-गण के रूप में जाना जाता है। ब्रह्मांड के विभिन्न हिस्सों में देवता और दानव हैं, और मानव समाज में भी कुछ लोग देवताओं से मिलते-जुलते हैं जबकि अन्य राक्षसों से मिलते-जुलते हैं। यदि ज्योतिषीय गणना के अनुसार एक ईश्वरीय और एक आसुरी प्रकृति के बीच संघर्ष होता था, तो विवाह नहीं होता था। इसी तरह, प्रतिलोम और अनुलोम की गणना की जाती थी। केंद्रीय विचार यह है कि यदि लड़का और लड़की एक समान स्तर पर होते हैं तो विवाह सुखी होगा, जबकि असमानता से दुख होगा। चूंकि अब विवाह में देखभाल नहीं की जाती है, अब हम कई तलाक पाते हैं। वास्तव में, तलाक अब एक आम मामला बन गया है, हालाँकि पहले किसी का विवाह आजीवन चलता था, और पति-पत्नी के बीच इतना स्नेह होता था कि पति के मरने पर पत्नी स्वेच्छा से मर जाती थी या अपने पूरे जीवन में एक वफादार विधवा बनी रहती थी। अब, निश्चित रूप से, यह संभव नहीं रह गया है, क्योंकि मानव समाज पशु समाज के स्तर पर गिर गया है। विवाह अब केवल सहमति से होता है। दम्पत्येऽभिरुचिर्हेतुः (भाग. १२.२.३)। अभिरुचि शब्द का अर्थ है "सहमति"। यदि लड़का और लड़की केवल शादी करने के लिए सहमत हैं, तो शादी हो जाती है। लेकिन जब वैदिक प्रणाली का कठोरता से पालन नहीं किया जाता है, तो विवाह अक्सर तलाक में समाप्त हो जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥