यदिदं कूपमग्नाया भवतो दर्शनं मम ।
न ब्राह्मणो मे भविता हस्तग्राहो महाभुज ।
कचस्य बार्हस्पत्यस्य शापाद् यमशपं पुरा ॥ २२ ॥
अनुवाद
"कुएँ में गिरने के कारण ही मेरा तुमसे मिलना संभव हुआ। निश्चय ही ये ईश्वरीय लीला थी। जब मैंने विद्वान ब्रहस्पति के पुत्र कच को श्राप दिया तो उसने मुझे श्राप दिया कि मुझे ब्राह्मण पति नहीं मिलेगा। इसलिए हे बलशाली, अब मेरा किसी ब्राह्मण से विवाह होना असंभव है।"
“I met you because I fell into the well. Undoubtedly, this was the law of destiny. When I cursed Kach, the son of the great scholar Brihaspati, he cursed me that I will not be able to get a Brahmin husband. Therefore, O Mahabhuja! There is no possibility of me becoming the wife of any Brahmin.”
तात्पर्य
विद्वान देवता पुरोहित बृहस्पति के पुत्र कच, शुक्राचार्य के छात्र थे, जिनसे उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को जीवित करने की कला सीखी थी जिसकी अकाल मृत्यु हो गई हो। मृत-संजीवनी नामक यह कला विशेष रूप से युद्धकाल के दौरान उपयोग की जाती थी। जब कोई युद्ध होता था, तो सैनिक निश्चित रूप से अकाल मृत्यु मरते थे, लेकिन यदि एक सैनिक का शरीर अक्षत था, तो उसे मृत-संजीवनी की इस कला द्वारा फिर से जीवित किया जा सकता था। यह कला शुक्राचार्य और कई अन्य लोगों को ज्ञात थी, और बृहस्पति के पुत्र कच इसे सीखने के लिए शुक्राचार्य के छात्र बने। देवयानी कच को अपना पति बनाना चाहती थी, लेकिन कच, शुक्राचार्य के प्रति सम्मान के कारण, गुरु की बेटी को एक सम्मानित श्रेष्ठ के रूप में देखते थे और इसलिए उससे विवाह करने से इनकार कर दिया। देवयानी ने गुस्से में कच को यह कहकर श्राप दिया कि यद्यपि उसने अपने पिता से मृत-संजीवनी की कला सीखी है, पर वह बेकार होगी। इस तरह से शापित होने पर, कच ने देवयानी को यह शाप देकर बदला लिया कि उसका कभी कोई ऐसा पति नहीं होगा जो ब्राह्मण हो। क्योंकि देवयानी को ययाति पसंद थे, जो क्षत्रिय थे, इसलिए उसने उन्हें अपनी धर्म पत्नी स्वीकार करने का अनुरोध किया। हालाँकि यह प्रतिलोम-विवाह होगा, जो एक उच्च परिवार की बेटी और एक निम्न परिवार के पुत्र के बीच का विवाह है, पर उसने बताया कि यह व्यवस्था प्रोविडेंस द्वारा बनाई गई थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥