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bhagavat 9.18.11: अरे, जरा देख तो इस सेविका शर्मिष्ठा के कारनामे! सारे शिष्टाचार को ताक पर रखकर मेरे वस्त्र पहन लिए हैं, जैसे कोई कुत्ता यज्ञ के लिए रखे गए घी को छीन लेता है।   |   bhagavat अध्याय 9.18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 18: राजा ययाति को यौवन की पुन:प्राप्ति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.18.11 
अहो निरीक्ष्यतामस्या दास्या: कर्म ह्यसाम्प्रतम् ।
अस्मद्धार्यं धृतवती शुनीव हविरध्वरे ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
अरे, जरा देख तो इस सेविका शर्मिष्ठा के कारनामे! सारे शिष्टाचार को ताक पर रखकर मेरे वस्त्र पहन लिए हैं, जैसे कोई कुत्ता यज्ञ के लिए रखे गए घी को छीन लेता है।
 
Hey, just look at the deeds of this maid Sharmishtha, she has thrown all etiquette aside and worn my clothes, as if a dog snatches away the ghee kept for the yagya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)