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bhagavat 9.17.4: काश्य के बेटे का नाम काशि था और उनके बेटे का नाम राष्ट्र था, जो दीर्घतम के पिता थे। दीर्घतम के धन्वंतरि नामक बेटे हुए जो आयुर्वेद के जनक थे और साथ ही वे भगवान वासुदेव के अवतार थे जो यज्ञों के फल भोगते हैं। जो धन्वंतरि का नाम याद करता है उसके सारे रोग दूर हो सकते हैं।   |   bhagavat अध्याय 9.17: पुरूरवा के पुत्रों की वंशावली   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 17: पुरूरवा के पुत्रों की वंशावली  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.17.4 
काश्यस्य काशिस्तत्पुत्रो राष्ट्रो दीर्घतम:पिता ।
धन्वन्तरिर्दीर्घतमस आयुर्वेदप्रवर्तक: ।
यज्ञभुग् वासुदेवांश: स्मृतमात्रार्तिनाशन: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
काश्य के बेटे का नाम काशि था और उनके बेटे का नाम राष्ट्र था, जो दीर्घतम के पिता थे। दीर्घतम के धन्वंतरि नामक बेटे हुए जो आयुर्वेद के जनक थे और साथ ही वे भगवान वासुदेव के अवतार थे जो यज्ञों के फल भोगते हैं। जो धन्वंतरि का नाम याद करता है उसके सारे रोग दूर हो सकते हैं।
 
Kasya's son was Kashi and his son was Rashtra who was the father of Dirghatama. The eldest had a son named Dhanvantari who was the incarnation of Lord Vasudev, the father of Ayurveda and enjoyer of all the fruits of sacrifice. One who remembers the name of Dhanvantari can be cured of all his diseases.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)