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श्लोक 9.16.17  |
गत्वा माहिष्मतीं रामो ब्रह्मघ्नविहतश्रियम् ।
तेषां स शीर्षभी राजन् मध्ये चक्रे महागिरिम् ॥ १७ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन, तब परशुराम उस माहिष्मती नगरी में गये जो एक ब्राह्मण के पापपूर्ण वध के कारण पहले ही विनष्ट हो चुकी थी। उन्होंने उस नगरी के बीचोबीच कार्तवीर्यार्जुन के बेटों के शरीर से कटे सिरों का एक पहाड़ बना दिया। |
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| हे राजन, तब परशुराम उस माहिष्मती नगरी में गये जो एक ब्राह्मण के पापपूर्ण वध के कारण पहले ही विनष्ट हो चुकी थी। उन्होंने उस नगरी के बीचोबीच कार्तवीर्यार्जुन के बेटों के शरीर से कटे सिरों का एक पहाड़ बना दिया। |
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