Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.16.14: यद्यपि परशुराम सहित जमदग्नि के सभी पुत्र घर से दूर थे, फिर भी जैसे ही उन्होंने रेणुका के "हे राम! हे पुत्र!" की ऊँची आवाज़ में पुकार सुनी, वे तुरंत आश्रम लौट आए, जहाँ उन्होंने अपने पिता को मृत पाया। | bhagavat अध्याय 9.16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदुपश्रुत्य दूरस्था हा रामेत्यार्तवत्स्वनम् ।
त्वरयाश्रममासाद्य ददृशु: पितरं हतम् ॥ १४ ॥
अनुवाद
यद्यपि परशुराम सहित जमदग्नि के सभी पुत्र घर से दूर थे, फिर भी जैसे ही उन्होंने रेणुका के "हे राम! हे पुत्र!" की ऊँची आवाज़ में पुकार सुनी, वे तुरंत आश्रम लौट आए, जहाँ उन्होंने अपने पिता को मृत पाया।
Although all the sons of Jamadagni, including Parashurama, were at a great distance from home, as soon as they heard Renuka's loud cry of "O Rama! O son!", they immediately returned to the hermitage where they found their father dead.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥