Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.16.11: कार्तवीर्यार्जुन के पुत्र पाप कर्म करने के लिए दृढ़ निश्चयी थे। अतः जब उन्होंने जमदग्नि को आग के पास यज्ञ करते हुए और उत्तमश्लोक भगवान का ध्यान करते हुए देखा तो उन्होंने इस अवसर का लाभ उठा कर उनकी हत्या कर दी। | bhagavat अध्याय 9.16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वाग्न्यागार आसीनमावेशितधियं मुनिम् ।
भगवत्युत्तमश्लोके जघ्नुस्ते पापनिश्चया: ॥ ११ ॥
अनुवाद
कार्तवीर्यार्जुन के पुत्र पाप कर्म करने के लिए दृढ़ निश्चयी थे। अतः जब उन्होंने जमदग्नि को आग के पास यज्ञ करते हुए और उत्तमश्लोक भगवान का ध्यान करते हुए देखा तो उन्होंने इस अवसर का लाभ उठा कर उनकी हत्या कर दी।
The sons of Kartavirya Arjuna were determined to commit sinful acts. Therefore, when they saw Jamadagni performing a sacrifice near the fire and meditating on Lord Uttamasloka, they took advantage of the opportunity and killed him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥