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bhagavat 9.16.10: एक बार जब परशुराम वसुमान और अपने अन्य भाइयों के साथ जंगल में चले गए, तो कार्तवीर्यार्जुन के पुत्रों ने अवसर का लाभ उठाकर अपनी शत्रुता का बदला लेने के उद्देश्य से जमदग्नि के आश्रम में प्रवेश किया।   |   bhagavat अध्याय 9.16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.16.10 
एकदाश्रमतो रामे सभ्रातरि वनं गते ।
वैरं सिषाधयिषवो लब्धच्छिद्रा उपागमन् ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
एक बार जब परशुराम वसुमान और अपने अन्य भाइयों के साथ जंगल में चले गए, तो कार्तवीर्यार्जुन के पुत्रों ने अवसर का लाभ उठाकर अपनी शत्रुता का बदला लेने के उद्देश्य से जमदग्नि के आश्रम में प्रवेश किया।
 
Once when Parashurama had gone to the forest from the ashram along with Vasumana and other brothers, the sons of Kartivirya Arjuna took advantage of the opportunity and went to the ashram of Jamdagni to take revenge of their enmity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)