Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.15.35-36: तत्पश्चात् परशुराम ने बाँह कटे कार्तवीर्यार्जुन का सिर काट दिया, जो मानो पर्वत की चोटी सा था। जब कार्तवीर्यार्जुन के दस हजार पुत्रों ने अपने पिता की मृत्यु देखी, तो वे सभी भयभीत होकर भाग गए। तब शत्रु का वध करके परशुराम ने कामधेनु को छुड़ा लिया, जिसे बहुत कष्ट सहना पड़ा था, और उसे अपने बछड़े सहित अपने घर ले आए और अपने पिता जमदग्नि को सौंप दिया। | bhagavat अध्याय 9.15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् परशुराम ने बाँह कटे कार्तवीर्यार्जुन का सिर काट दिया, जो मानो पर्वत की चोटी सा था। जब कार्तवीर्यार्जुन के दस हजार पुत्रों ने अपने पिता की मृत्यु देखी, तो वे सभी भयभीत होकर भाग गए। तब शत्रु का वध करके परशुराम ने कामधेनु को छुड़ा लिया, जिसे बहुत कष्ट सहना पड़ा था, और उसे अपने बछड़े सहित अपने घर ले आए और अपने पिता जमदग्नि को सौंप दिया।
Thereafter Parasurama cut off the arm-severed head of Kartavirya Arjuna, which was as big as a mountain peak. When the ten thousand sons of Kartavirya Arjuna saw their father killed, they all fled in fear. Then after killing the enemy Parasurama freed Kamadhenu, who had suffered a lot and brought her home along with her calf and gave her to his father Jamadagni.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥