एक रथ और एक हाथी
पांच पैदल सैनिक
तीन घोड़े इसके जानकारों द्वारा
पत्ति कहा जाता है
यह तीनपट्टियों को
बुद्धिमान लोग सेनामुख कहते हैं
तीन सेनामुखों को
एक गुलम कहा जाता है
तीन गुलम एक गण है
तीन गण एक वाहिनी कहलाता है
तीन वाहिनियों को
विद्वान लोग प्रतना कहते हैं
तीन प्रतनाओं को
एक चमू होता है और तीन चमूओं को
एक अनीकिनी कहते हैं
दस अनीकिनियों को
विद्वान लोग अक्षौहिणी कहते हैं
अक्षौहिणी की गणना
द्विज श्रेष्ठ रथों की संख्या
गणित के ज्ञाताओं ने
एकबीस हज़ार, आठ सौ सत्तर बताई है
और आठ सौ तो सत्तर और हैं
हाथियों की संख्या भी
इतनी ही यहाँ बताई गई है
इसलिए एक लाख सात हज़ार
नौ सौ जानना चाहिए
पैदल सैनिकों की संख्या
पचास हज़ार, तीन सौ और पाँच है
और घोड़ों की संख्या
छियासठ हज़ार, दस और छह है
यथोक्त विधि से गणना करने पर
इसे अक्षौहिणी कहते हैं
गणना सिद्धांत वेत्ता
