श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  9.15.30 
अचोदयद्धस्तिरथाश्वपत्तिभि-
र्गदासिबाणर्ष्टिशतघ्निशक्तिभि: ।
अक्षौहिणी: सप्तदशातिभीषणा-
स्ता राम एको भगवानसूदयत् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
परशुराम को देखते ही कार्तवीर्यार्जुन सशंकित हो गया और उसने तुरंत ही अनेक हथियारों से युक्त हाथी, रथ, घोड़े और पैदल सैनिक युद्ध करने के लिए प्रेषित किए। उसने परशुराम को रोकने के लिए पूरे सत्रह अक्षौहिणी सैनिकों को भेज दिया, किन्तु भगवान् परशुराम ने अकेले ही उन सबका संहार कर दिया।
 
On seeing Parashurama, Kartavirya Arjuna got scared and immediately sent many elephants, chariots, horses and infantry to fight him who were equipped with various weapons like mace, sword, arrow, Rishti, Shataghni, Shakti etc. He sent seventeen Akshauhini soldiers to stop Parashurama, but Lord Parashurama single-handedly destroyed them all.
तात्पर्य
वचन अक्षौहिणी एक ऐसी सेना को कहा जाता है कि जिसमें 21870 रथ और हाथी , 109350 पैदल सिपाही और 65,610 घोड़े होते हैं । इसका सही वर्णन महाभारत के आदिपर्व, द्वितीय अध्याय में इस प्रकार दिया गया है :

एक रथ और एक हाथी

पांच पैदल सैनिक

तीन घोड़े इसके जानकारों द्वारा

पत्ति कहा जाता है

यह तीनपट्टियों को

बुद्धिमान लोग सेनामुख कहते हैं

तीन सेनामुखों को

एक गुलम कहा जाता है

तीन गुलम एक गण है

तीन गण एक वाहिनी कहलाता है

तीन वाहिनियों को

विद्वान लोग प्रतना कहते हैं

तीन प्रतनाओं को

एक चमू होता है और तीन चमूओं को

एक अनीकिनी कहते हैं

दस अनीकिनियों को

विद्वान लोग अक्षौहिणी कहते हैं

अक्षौहिणी की गणना

द्विज श्रेष्ठ रथों की संख्या

गणित के ज्ञाताओं ने

एकबीस हज़ार, आठ सौ सत्तर बताई है

और आठ सौ तो सत्तर और हैं

हाथियों की संख्या भी

इतनी ही यहाँ बताई गई है

इसलिए एक लाख सात हज़ार

नौ सौ जानना चाहिए

पैदल सैनिकों की संख्या

पचास हज़ार, तीन सौ और पाँच है

और घोड़ों की संख्या

छियासठ हज़ार, दस और छह है

यथोक्त विधि से गणना करने पर

इसे अक्षौहिणी कहते हैं

गणना सिद्धांत वेत्ता

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)