स एकदा तु मृगयां विचरन् विजने वने ।
यदृच्छयाश्रमपदं जमदग्नेरुपाविशत् ॥ २३ ॥
अनुवाद
एक बार की बात है, जब कार्तवीर्यार्जुन बिना किसी कार्यक्रम के एकांत जंगल में घूम रहा था और शिकार कर रहा था, तो वह जमदग्नि के निवास के पास पहुँच गया।
Once when Kartavirya Arjuna was hunting without any programme, he came near the residence of Jamadagni.
तात्पर्य
कार्तवीर्यार्जुन अनायास ही जमदग्नि के आश्रम में गया, पर अवकूलतावश उसी की अद्भुत शक्ति के कारण वहाँ गया और परशुराम को अप्रशन्न कर दिया। यही उसके परशुराम द्वारा मारे जाने की प्रस्तावना थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥