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bhagavat 9.15.22: जब रावण ने स्त्रियों के सामने कार्तवीर्यार्जुन का अपमान करने का प्रयास किया और उसे नाराज़ कर दिया, तो उसने रावण को खेल-खेल में उसी प्रकार बंदी बनाकर माहिष्मती नगर के कारागार में डाल दिया जिस प्रकार कोई बन्दर को पकड़ लेता है। बाद में उसने उसे बिना किसी परवाह के मुक्त कर दिया।   |   bhagavat अध्याय 9.15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 15: भगवान् का योद्धा अवतार, परशुराम  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  9.15.22 
गृहीतो लीलया स्त्रीणां समक्षं कृतकिल्बिष: ।
माहिष्मत्यां सन्निरुद्धो मुक्तो येन कपिर्यथा ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
जब रावण ने स्त्रियों के सामने कार्तवीर्यार्जुन का अपमान करने का प्रयास किया और उसे नाराज़ कर दिया, तो उसने रावण को खेल-खेल में उसी प्रकार बंदी बनाकर माहिष्मती नगर के कारागार में डाल दिया जिस प्रकार कोई बन्दर को पकड़ लेता है। बाद में उसने उसे बिना किसी परवाह के मुक्त कर दिया।
 
When Ravana tried to insult Kartavirya Arjuna in front of women and angered him, he playfully captured Ravana and put him in the prison of Mahishmati city just as one would catch a monkey. Later he released him without any concern.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)