बृहस्पति और शुक्र के बीच शत्रुता के कारण, शुक्र ने चंद्रमा का पक्ष लिया और सभी राक्षस उसके साथ हो गए। किन्तु अपने गुरु के पुत्र होने के कारण शिवजी ने प्यार और स्नेह के कारण बृहस्पति का साथ दिया और उनके साथ सभी भूत-प्रेत भी हो गए।
Due to enmity between Brihaspati and Shukra, Shukra took the side of Som (Moon) and all the demons joined him. But being the son of his Guru, Shivji out of affection joined Brihaspati and all the ghosts and spirits also joined him.
तात्पर्य
चन्द्रमा एक देवताओं में से एक है, परन्तु अन्य देवताओं के विरुद्ध युद्ध करने के लिए उसने राक्षसों की सहायता ली। शुक, बृहस्पति का शत्रु होने के नाते, उसने भी बृहस्पति के प्रति क्रोध में प्रतिशोध के लिए चंद्र देव का साथ दिया। इस स्थिति का मुकाबला करने के लिए, भगवान शिव, जो बृहस्पति के प्रति स्नेही थे, बृहस्पति में शामिल हो गए। बृहस्पति के पिता अंगिरा थे, जिनसे भगवान शिव ने ज्ञान प्राप्त किया था। इसलिए भगवान शिव को बृहस्पति के प्रति कुछ स्नेह था और इस लड़ाई में उनका पक्ष लिया। श्रीधर स्वामी ने टिप्पणी की है, "अंगिरस: सकशात प्राप्ता विद्यो हर इति प्रसिद्ध:' 'जैसा कि ज्ञात है कि भगवान शिव ने अंगिरा से ज्ञान प्राप्त किया था।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥