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bhagavat 9.14.5: यद्यपि देवताओं के गुरु बृहस्पति ने सोम से तारा को लौटाने के लिए बार-बार अनुरोध किया, किंतु उसने मिथ्या गर्ववश ऐसा नहीं किया। परिणामस्वरूप, देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया।   |   bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  9.14.5 
यदा स देवगुरुणा याचितोऽभीक्ष्णशो मदात् ।
नात्यजत् तत्कृते जज्ञे सुरदानवविग्रह: ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि देवताओं के गुरु बृहस्पति ने सोम से तारा को लौटाने के लिए बार-बार अनुरोध किया, किंतु उसने मिथ्या गर्ववश ऐसा नहीं किया। परिणामस्वरूप, देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया।
 
Although Brihaspati, the Guru of the Gods, repeatedly requested Som to return Tara, he did not. This happened due to his false pride. As a result, a war broke out between the Gods and the Asuras.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)