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bhagavat 9.14.4: तीनों लोकों [ऊपरी, मध्य और निचले ग्रहों की प्रणालियों] को जीतने के बाद, चंद्रमा के देवता सोम ने राजसूय-यज्ञ नामक एक महान यज्ञ किया। अत्यधिक घमंडी होने के कारण, उन्होंने बृहस्पति की पत्नी तारा का अपहरण कर लिया।   |   bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.14.4 
सोऽयजद् राजसूयेन विजित्य भुवनत्रयम् ।
पत्नीं बृहस्पतेर्दर्पात् तारां नामाहरद् बलात् ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों [ऊपरी, मध्य और निचले ग्रहों की प्रणालियों] को जीतने के बाद, चंद्रमा के देवता सोम ने राजसूय-यज्ञ नामक एक महान यज्ञ किया। अत्यधिक घमंडी होने के कारण, उन्होंने बृहस्पति की पत्नी तारा का अपहरण कर लिया।
 
After conquering the three worlds, Som performed a great sacrifice called Rajasuya. Being extremely proud, he forcibly abducted Brihaspati's wife Tara.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)