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bhagavat 9.14.32: उर्वशी को अपने बिस्तर पर न देखकर पुरुरवा अति दुखी हो गया। उसके प्रति अगाध प्रेम के कारण वह हृदय में व्याकुल था। इसके पश्चात् विलाप करते हुए वह उन्मत्त की भाँति सारी पृथ्वी में घूमने लगा।   |   bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.14.32 
ऐलोऽपि शयने जायामपश्यन् विमना इव ।
तच्चित्तो विह्वल: शोचन् बभ्रामोन्मत्तवन्महीम् ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
उर्वशी को अपने बिस्तर पर न देखकर पुरुरवा अति दुखी हो गया। उसके प्रति अगाध प्रेम के कारण वह हृदय में व्याकुल था। इसके पश्चात् विलाप करते हुए वह उन्मत्त की भाँति सारी पृथ्वी में घूमने लगा।
 
Pururava was extremely saddened when he did not find Urvashi on his bed. He was deeply upset due to his attachment towards her. Thereafter, he started roaming all over the earth like a mad person, lamenting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)