Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.14.31: गंधर्वगण उन दोनों मेम्नों को छोड़कर बिजली के समान तेज प्रकाशमय हो उठे जिससे पुरुरवा का घर जगमगा उठा। तब उर्वशी ने देखा कि उसके पति दोनों मेमनों को हाथ में लेकर लौट रहे हैं, परन्तु वे नग्न अवस्था में हैं; अतः उसने उनका त्याग कर दिया। | bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते विसृज्योरणौ तत्र व्यद्योतन्त स्म विद्युत: ।
आदाय मेषावायान्तं नग्नमैक्षत सा पतिम् ॥ ३१ ॥
अनुवाद
गंधर्वगण उन दोनों मेम्नों को छोड़कर बिजली के समान तेज प्रकाशमय हो उठे जिससे पुरुरवा का घर जगमगा उठा। तब उर्वशी ने देखा कि उसके पति दोनों मेमनों को हाथ में लेकर लौट रहे हैं, परन्तु वे नग्न अवस्था में हैं; अतः उसने उनका त्याग कर दिया।
Leaving the two lambs, the Gandharvas became as bright as lightning, illuminating Pururava's house. Then Urvashi saw that her husband had returned with the two lambs in his hands, but he was naked; therefore she abandoned him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥